संतों का सानिध्य संस्कारों से मिलता है, इसे व्यर्थ न गंवाएं : मणिभद्र मुनि
जय आनंद मधुकर रतन भवन, बांधा तालाब दुर्ग में आध्यात्मिक प्रवचन श्रृंखला जारी

दुर्ग। जय आनंद मधुकर रतन भवन, बांधा तालाब में चल रहे आध्यात्मिक वर्षावास के अंतर्गत रविवार को आयोजित धर्मसभा में राष्ट्र संत, नेपाल केसरी एवं मानव मिलन के संस्थापक परम पूज्य मणिभद्र मुनि महाराज ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक जीवन का अमूल्य संदेश दिया। उन्होंने कहा कि संतों का सानिध्य संस्कारों से मिलता है, इसलिए इसे कभी व्यर्थ नहीं गंवाना चाहिए।

संतों की संगति व्यक्ति के विचारों, व्यवहार और जीवन मूल्यों को श्रेष्ठ बनाती है तथा आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त करती है।अपने प्रेरक प्रवचन में गुरुदेव ने कहा कि यदि आत्मा को परमात्मा बनने की दिशा में आगे बढ़ाना है तो सत्संग और संतों का सान्निध्य जीवन का अभिन्न अंग बनाना होगा। श्रेष्ठ संस्कार ही मनुष्य को सही दिशा प्रदान करते हैं और साधना के माध्यम से उसे सत्कर्मों एवं अंततः समाधि के पथ तक पहुंचाते हैं।उन्होंने कहा कि मन की निर्मलता आध्यात्मिक उन्नति का मूल आधार है। जब मन पवित्र होता है, तभी साधना सफल होती है तथा जीवन में संयम, सेवा, सद्भाव और करुणा के संस्कार विकसित होते हैं।
संतों का सानिध्य व्यक्ति के भीतर सकारात्मक परिवर्तन लाकर जीवन को सार्थक बनाता है।मणिभद्र मुनि महाराज ने कहा कि सत्य को स्वीकार करने का साहस ही वास्तविक ज्ञान का प्रारंभ है। किसी को गलत सिद्ध करना हमारा उद्देश्य नहीं होना चाहिए, बल्कि स्वयं को सही बनाने का निरंतर प्रयास करना चाहिए। उन्होंने श्रद्धा और शंका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जहां श्रद्धा होती है वहां शंका का स्थान नहीं रहता, जबकि कुतर्क केवल भ्रम और अज्ञान को बढ़ाता है। इसलिए जीवन में श्रद्धा, विवेकपूर्ण चिंतन और सत्संग का समन्वय आवश्यक है।
धर्मसभा का शुभारंभ पुनीत मुनि महाराज द्वारा प्रस्तुत भक्ति गीतों से हुआ। इसके पश्चात प्रवचन प्रभाविका साध्वी श्री लक्ष्मी जी महाराज ने भी श्रद्धालुओं को धर्म, संयम और साधना का संदेश देते हुए आध्यात्मिक जीवन अपनाने की प्रेरणा दी।वर्षावास के दौरान जय आनंद मधुकर रतन भवन में त्याग और तपस्या का अनुपम वातावरण बना हुआ है। श्री टीकाराम-श्रीमती सुनीता भंडारी, पूनम देशलहरा, प्रवीण देशलहरा, प्रतीक सुराणा, खुशबू बाघमार, किरण देवी संचेती, तनीषा बोथरा सहित अनेक श्रद्धालुओं की विविध तपस्याएं एवं गुप्त आराधनाएं गतिमान हैं।
धर्मसभा के बाद नवकार महामंत्र जाप संपन्न हुआ। इसके उपरांत पुनीत मुनि महाराज के सान्निध्य में महिलाओं के लिए विशेष धार्मिक प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम में उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं ने गुरुदेव के मंगल प्रवचनों का श्रवण कर आध्यात्मिक जीवन को श्रेष्ठ बनाने का संकल्प लिया।
