कामधेनु विश्वविद्यालय में “गाय एवं भैंस पालन प्रबंधन एवं उद्यमिता विकास“ पर 3 दिवसीय प्रशिक्षण का शुभारंभ”

कामधेनु विश्वविद्यालय में “गाय एवं भैंस पालन प्रबंधन एवं उद्यमिता विकास“ पर 3 दिवसीय प्रशिक्षण का शुभारंभ”


दाऊ श्री वासुदेव चंद्राकर कामधेनु विश्वविद्यालय, दुर्ग के कुलपति डॉ.आर.आर.बी.सिंह के मार्गदर्शन एवं अधिष्ठाता डॉ. सुशांत पाल, निदेशक विस्तार शिक्षा डॉ.मनोज गेंदले के कुशल नेतृत्व में पशुचिकित्सा एवं पशुपालन महाविद्यालय, अंजोरा में छत्तीसगढ़ एग्रीकॉन समिति के सौजन्य से ”गाय एवं भैंस पालन प्रबंधन एवं उद्यमिता विकास” पर 13 से 15 मई 2026 तक तीन दिवसीय प्रशिक्षण का आयोजन किया जा रहा है।


इस कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि अधिष्ठाता डॉ.सुशांत पाल, विशिष्ट अतिथि निदेशक विस्तार शिक्षा डॉ.मनोज गेंदले, अधिष्ठाता छात्र कल्याण डॉ.दुर्गा चौरसिया एवं कार्यक्रम की अध्यक्षता निदेशक प्रक्षेत्र एवं अधिष्ठाता डॉ.धीरेन्द्र भोंसले, विश्वविद्यालय जनसंपर्क अधिकारी डॉ.दिलीप चौधरी, छत्तीसगढ़ एग्रीकॉन समिति से काजल कश्यप, प्रशिक्षण आयोजक डॉ.रामचन्द्र रामटेके एवं 36 प्रशिक्षणार्थियों की उपस्थिति में किया गया।


प्रशिक्षण आयोजक डॉ.रामचन्द्र रामटेके ने बताया कि इस तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में गाय/भैंस की विभिन्न नस्लें, बधियाकरण, नस्ल सुधार, कृत्रिम गर्भाधान, प्रसव एवं आहार प्रबंधन, बीमारियॉ, रोकथाम, छ.ग. एवं केन्द्र शासन के द्वारा गाय/भैंस पालन हेतु बैंक लोन प्रक्रिया, हरे चारे का महत्व, स्वच्छ दुग्ध उत्पादन तकनीक एवं दुग्ध का वैल्यु एडिसन एवं अन्य विषय पर विस्तार से प्रशिक्षणार्थियों को प्रशिक्षण दिया जावेगा।
डॉ.धीरेन्द्र भोंसले ने प्रशिक्षणार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि परंपरागत पद्वति से पशुपालन करने में नवीनतम वैज्ञानिक तकनीक का उपयोग करते हुए बदलाव लाना आवश्यक है।

प्रशिक्षणार्थियों ने अपनी सहभागिता किस उत्साह के साथ किया तथा व्यवसाय एवं उद्यमिता में अंतर को समझना आवश्यक है। कुछ नया कर सके यह सीखना आवश्यक है।


डॉ.दुर्गा चौरसिया ने प्रशिक्षणार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि ज्ञान को समर्पण भाव से सीखकर पशुपालक एवं किसान राष्ट्र के विकास में अपना योगदान दें तथा आर्गेनिक फार्मिंग आज की आवश्यकता है।


डॉ.एम.के.गेंदले ने ग्रामीण परिवेश में पशुओं के आहार की जानकारी देते हुए कहा कि वैज्ञानिक तरीके से पशुपालन कर पशुपालक अपनी आय को बढ़ा सकते है। इस हेतु अच्छे नस्ल के जानवर, आहार पर वैज्ञानिक तरीका, प्रबंधन एवं पशुओं को समय-समय पर टीकाकरण, स्वास्थ्य आदि पर निरंतर वैज्ञानिक पद्वति एवं एकीकृत फार्मिंग को अपनाकर अपनी आय में वृद्वि कर सकते है।


डॉ.एस.पॉल ने प्रशिक्षणार्थियों के विकास एवं उन्हें आर्थिक रूप से सुदृढ़ होने के लिए प्रशिक्षण में प्राप्त सैद्वांतिक एवं व्यावहारिक ज्ञान को प्रश्न एवं उसके उत्तर के रूप में नोट्स तैयार कर प्रशिक्षण का लाभ लेने हेतु प्रेरित किया।


कार्यक्रम का संचालन डॉ.सोनाली प्रुष्टि, आभार प्रदर्शन डॉ.शबीर अनंत द्वारा किया गया।

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