क्या अमलीडीह में “मौत का तालाब” खोद रहे मुरूम ठेकेदार? प्रशासन क्यों मौन?

धमतरी जिले के ग्राम अमलीडीह में विकास के नाम पर आखिर किसकी मिलीभगत से अवैध मुरूम खनन का खेल चल रहा है? क्या पंचायत और ठेकेदार की सांठगांठ से गांव का तालाब ही खत्म किया जा रहा है?
ग्रामीणों का आरोप है कि रोजाना 50 से 100 हाइवा-ट्रैक्टर मुरूम लेकर निकल रहे हैं, लेकिन न पीट पास दिख रहा है, न रॉयल्टी और न ही माइनिंग परमिट। आखिर बिना अनुमति के 15 से 20 फीट गहरी खुदाई कैसे हो रही है?क्या जिला प्रशासन और खनिज विभाग को इस अवैध उत्खनन की जानकारी नहीं है, या फिर सब कुछ जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है?
ग्रामीणों का कहना है कि तालाब की खुदाई से बरसात में गांव डूबने का खतरा बढ़ गया है और भूजल स्तर भी लगातार नीचे जा रहा है।क्या पर्यावरण कानूनों और माइनिंग एक्ट का खुलेआम उल्लंघन नहीं हो रहा? रोज लाखों रुपये के इस कथित काले कारोबार पर कार्रवाई कब होगी?
ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि अगर जल्द रोक नहीं लगी, तो अमलीडीह का पर्यावरण और भूगोल दोनों बर्बाद होने की जिम्मेदारी कौन लेगा?
