दंतेवाड़ा की माटी से अमेरिका तक बनाई पहचान, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने गणेश कुमार कर को लिखी स्नेह भरी पाती

दंतेवाड़ा की माटी से अमेरिका तक बनाई पहचान, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने गणेश कुमार कर को लिखी स्नेह भरी पाती

प्रवासी छत्तीसगढ़ियों को एकजुट करने और विदेशों में छत्तीसगढ़ की संस्कृति, परंपरा एवं विरासत को सहेजने के प्रयासों की मुख्यमंत्री ने की सराहना

रायपुर, 6 नवंबर 2026। छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले की माटी से निकलकर अमेरिका में अपनी अलग पहचान बनाने वाले प्रवासी छत्तीसगढ़िया गणेश कुमार कर को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर स्नेह भरा पत्र लिखकर शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री ने विदेश में रहते हुए भी छत्तीसगढ़ की भाषा, संस्कृति और परंपराओं से जुड़े रहने तथा प्रवासी छत्तीसगढ़ियों को एकजुट करने के उनके प्रयासों की सराहना की है।

मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में कहा कि दंतेवाड़ा से अमेरिका तक गणेश कुमार कर की यात्रा प्रेरणादायक है। अपनी जन्मभूमि और सांस्कृतिक विरासत के प्रति उनका जुड़ाव प्रदेश के युवाओं के लिए मिसाल है। उन्होंने नॉर्थ अमेरिका छत्तीसगढ़ एसोसिएशन (NACHA) के माध्यम से विदेशों में बसे छत्तीसगढ़ियों को एक मंच पर लाने के प्रयासों को भी सराहनीय बताया।मुख्यमंत्री ने अमेरिका में आयोजित ‘स्वदेशी मेला’ की पहल की प्रशंसा करते हुए कहा कि इसके माध्यम से भारतीय उत्पादों, कला, संस्कृति और परंपराओं को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिल रही है।

वहीं, विद्यार्थियों की उच्च शिक्षा एवं छात्रवृत्ति के लिए संचालित ‘उड़ान’ पहल को सामाजिक जिम्मेदारी और मातृभूमि के प्रति समर्पण का प्रेरणादायक उदाहरण बताया।मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि विकसित भारत 2047 और विकसित छत्तीसगढ़ 2047 के संकल्प को पूरा करने में विदेशों में रह रहे छत्तीसगढ़ियों का अनुभव, ज्ञान और सहयोग महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने गणेश कुमार कर से विदेशों में निवासरत सभी छत्तीसगढ़ियों तक राज्य स्थापना दिवस की शुभकामनाएं पहुंचाने का आग्रह भी किया।

मुख्यमंत्री का व्यक्तिगत पत्र प्राप्त होने पर गणेश कुमार कर ने सोशल मीडिया पर वीडियो संदेश जारी कर उनके प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने वीडियो में मुख्यमंत्री का पत्र भी प्रदर्शित किया। दंतेवाड़ा जैसे आदिवासी बहुल वनांचल क्षेत्र से निकलकर अमेरिका तक पहचान बनाने और अपनी जन्मभूमि की संस्कृति को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाने का उनका प्रयास क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन रहा है।

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