तेलीबांधा चौक का नाम बदलने की घोषणा पर साहू समाज युवा प्रकोष्ठ का विरोध
निलेश साहू बोले—“नाम बदला तो प्रदेश स्तर पर होगा आंदोलन”तेलीबांधा सिर्फ चौक नहीं, छत्तीसगढ़ की सामाजिक पहचान और ऐतिहासिक स्मृतियों का प्रतीक—
प्रदेश साहू संघ युवा प्रकोष्ठ सह संयोजक निलेश साहू ने सरकार से निर्णय वापस लेने की मांग की
रायपुर। राजधानी रायपुर के तेलीबांधा चौक का नाम बदले जाने की मुख्यमंत्री की घोषणा को लेकर विरोध के स्वर तेज होने लगे हैं। प्रदेश साहू संघ युवा प्रकोष्ठ के सह संयोजक निलेश साहू ने इस निर्णय का कड़ा विरोध करते हुए सरकार से नाम परिवर्तन की घोषणा पर पुनर्विचार करने और तेलीबांधा चौक का नाम यथावत रखने की मांग की है।निलेश साहू ने कहा कि तेलीबांधा नाम महज किसी चौक की पहचान नहीं है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ की सामाजिक पहचान, स्थानीय इतिहास, परंपरा और साहू समाज की ऐतिहासिक स्मृतियों से जुड़ा हुआ नाम है।
वर्षों से इसी नाम से पहचाने जाने वाले स्थान का नाम बदलना स्थानीय लोगों की भावनाओं और सामाजिक विरासत से जुड़े विषय को प्रभावित करता है।उन्होंने कहा कि किसी भी स्थान के नाम के पीछे केवल प्रशासनिक पहचान नहीं होती, बल्कि उससे लोगों की यादें, इतिहास और सामाजिक सरोकार जुड़े होते हैं। इसलिए किसी ऐतिहासिक एवं प्रचलित नाम को बदलने से पहले स्थानीय नागरिकों और संबंधित समाज की भावनाओं को गंभीरता से समझना और उनका सम्मान करना आवश्यक है।
“नाम बदलने का प्रयास हुआ तो प्रदेश स्तर पर आंदोलन”निलेश साहू ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि यदि तेलीबांधा नाम को हटाकर किसी दूसरे नाम से चौक की पहचान स्थापित करने का प्रयास किया गया तो प्रदेश स्तर पर लोकतांत्रिक आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन किसी व्यक्ति या राजनीतिक दल के विरोध के लिए नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की स्थानीय पहचान और ऐतिहासिक-सामाजिक स्मृतियों के संरक्षण के लिए होगा।उन्होंने कहा कि तेलीबांधा चौक की पहचान दशकों से इसी नाम से रही है।
इसके साथ आम नागरिकों की भावनाएं और स्थानीय इतिहास जुड़ा हुआ है। ऐसे में केवल प्रशासनिक अथवा राजनीतिक निर्णय के आधार पर नाम बदलना उचित नहीं है।छत्तीसगढ़ की पहचान से जुड़े नामों के संरक्षण की मांगनिलेश साहू ने कहा कि छत्तीसगढ़ की अपनी विशिष्ट संस्कृति, परंपरा और सामाजिक विरासत है। यहां के चौक-चौराहों, स्थानों और सार्वजनिक स्थलों के नाम भी इस विरासत का हिस्सा हैं। इन नामों को बदलने से पहले उनके ऐतिहासिक और सामाजिक महत्व का व्यापक स्तर पर अध्ययन किया जाना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में छत्तीसगढ़ की परंपरा, इतिहास और सांस्कृतिक पहचान से जुड़े नामों में बदलाव को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में तेलीबांधा चौक के नाम परिवर्तन की घोषणा ने भी लोगों के बीच चिंता पैदा की है।“मुद्दा सिर्फ नाम का नहीं, पहचान और विरासत का है”निलेश साहू ने कहा कि तेलीबांधा का मुद्दा केवल एक नाम को बनाए रखने या बदलने का विषय नहीं है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ की स्थानीय पहचान, सामाजिक इतिहास और पीढ़ियों से जुड़ी स्मृतियों के संरक्षण का सवाल है।
उन्होंने मुख्यमंत्री और राज्य सरकार से मांग की कि तेलीबांधा चौक के नाम परिवर्तन की घोषणा पर पुनर्विचार करते हुए तेलीबांधा नाम को यथावत रखा जाए।उन्होंने कहा कि यदि सरकार द्वारा नाम परिवर्तन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती है तो प्रदेश साहू संघ युवा प्रकोष्ठ सामाजिक संगठनों, युवाओं और नागरिकों के साथ मिलकर लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराएगा।निलेश साहू ने दोहराया कि “छत्तीसगढ़ की पहचान यहां की मिट्टी, लोक संस्कृति, परंपराओं, सामाजिक इतिहास और वर्षों से प्रचलित नामों से बनी है। इन पहचान-चिह्नों को संरक्षित रखना समाज और सरकार दोनों की जिम्मेदारी है।
”उन्होंने कहा कि तेलीबांधा चौक का नाम किसी भी परिस्थिति में बदला नहीं जाना चाहिए। यदि नाम परिवर्तन का प्रयास किया गया तो प्रदेश साहू संघ युवा प्रकोष्ठ इसके खिलाफ व्यापक लोकतांत्रिक आंदोलन करेगा।
