शिक्षक संघर्ष मोर्चा ने टेट मुक्ति को लेकर दुर्ग में निकाली विशाल रैली, लंबित मांगों के निराकरण के लिए सौंपा ज्ञापन
दुर्ग, 25 अगस्त 2026। प्रदेश के एलबी संवर्ग के शिक्षक संगठनों के साझा मंच छत्तीसगढ़ शिक्षक संघर्ष मोर्चा दुर्ग के नेतृत्व में मंगलवार को शिक्षकों ने टेट मुक्ति विशाल रैली निकालकर अपनी लंबित एवं न्यायोचित मांगों को लेकर आवाज बुलंद की। रैली के बाद मोर्चा के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री, स्कूल शिक्षा मंत्री, मुख्य सचिव, स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव एवं संचालक, लोक शिक्षण संचालनालय के नाम कलेक्टर दुर्ग के प्रतिनिधि तहसीलदार को ज्ञापन सौंपते हुए मांगों पर शीघ्र आवश्यक आदेश जारी करने की मांग की।
जिला संयोजक शत्रुघन साहू, चन्द्रशेखर तिवारी एवं कमल वैष्णव ने कहा कि प्रदेश के शिक्षक संवर्ग लंबे समय से विभिन्न सेवा संबंधी विसंगतियों और समस्याओं से जूझ रहा है। इनका सीधा असर शिक्षकों की सेवा सुरक्षा, वेतन, पदोन्नति, पेंशन एवं भविष्य की सेवा-शर्तों पर पड़ रहा है। मोर्चा ने शासन से संवेदनशीलता के साथ इन समस्याओं का स्थायी एवं न्यायसंगत समाधान करने की मांग की।टेट की अनिवार्यता समाप्त करने सहित पांच प्रमुख मांगेंमोर्चा ने ज्ञापन के माध्यम से सेवारत शिक्षकों के लिए TET की अनिवार्यता समाप्त कर सेवा सुरक्षा सुनिश्चित करने की प्रमुख मांग रखी।
मोर्चा का कहना है कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा TET के लिए 31 अगस्त 2028 तक का समय दिए जाने के परिप्रेक्ष्य में सेवारत शिक्षकों की पदोन्नति में TET की अनिवार्यता समाप्त की जानी चाहिए। वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों के अनुभव और सेवा हितों को ध्यान में रखते हुए व्यावहारिक निर्णय लेने की मांग की गई।इसके साथ ही पंचायत संवर्ग में हुई प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा की गणना करते हुए सभी सेवा लाभ प्रदान करने, विशेष रूप से पुरानी पेंशन सहित शिक्षा विभाग में लागू सेवा संबंधी लाभ देने की मांग की गई।
मोर्चा ने लंबे समय से लंबित वेतन विसंगतियों का स्थायी निराकरण एवं केंद्रीय वेतनमान लागू करने की मांग भी उठाई। संगठन का कहना है कि समान कार्य और समान जिम्मेदारी के अनुरूप शिक्षकों को न्यायोचित वेतन मिलना चाहिए।ज्ञापन में 13 फरवरी 2026 के राजपत्र में आवश्यक संशोधन करने की मांग करते हुए कहा गया कि भर्ती एवं पदोन्नति नियमों में एलबी संवर्ग के हितों को सुरक्षित किया जाए तथा पदोन्नति से जुड़ी विसंगतियों को दूर किया जाए।इसके अलावा B.Ed. प्रशिक्षित शिक्षक संवर्ग के लिए ब्रिज कोर्स की व्यवस्था करने की मांग रखी गई, ताकि शिक्षकों की योग्यता संबंधी स्थिति स्पष्ट हो और उनकी भविष्य की सेवा सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
शिक्षक हितों के लिए संघर्ष जारी रखने का ऐलानमोर्चा ने कहा कि शिक्षक प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था की महत्वपूर्ण आधारशिला हैं और वे पूरी निष्ठा एवं जिम्मेदारी के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं। ऐसे में उनकी वर्षों से लंबित सेवा संबंधी समस्याओं का समाधान शासन की प्राथमिकता होना चाहिए।मोर्चा ने शासन से सभी मांगों पर समयबद्ध एवं सकारात्मक निर्णय लेकर शीघ्र आदेश जारी करने तथा शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ सार्थक चर्चा कर स्थायी समाधान निकालने का आग्रह किया।
साथ ही स्पष्ट किया कि शिक्षक हितों से जुड़े इन महत्वपूर्ण विषयों को लेकर लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से संघर्ष तब तक जारी रहेगा, जब तक मांगों का न्यायोचित समाधान नहीं हो जाता।
ज्ञापन सौंपने के दौरान जयंत यादव, युवराज साहू, संतोष शर्मा, कृष्णाराज पांण्डेय, विवेकानंद ताम्रकार, मदन साटकर, घनश्याम देवांगन, माधव चेलक, अशोक सिन्हा, किशन देशमुख, चंद्रहास साहू, वीरेंद्र वर्मा, सरस्वती गिरिया, अमिता हरमुख, प्रताप धनकर, विजय बेलचंदन, तिलक सेन, अशोक देशमुख, योगेश वर्मा, किरण गौर, सुनीति तिवारी, संजय चंद्राकर, राहुल झा, तिलकचंद्र साहू, टीकमचंद्र साहू, नीलू थापा, सुप्रिया भुवाल, अदिया नामदेव, ओमप्रकाश पाण्डेय, भवानी देशमुख, वेदराम जांगड़े, महेश चंद्राकर, रोहित देशमुख, राजेश चंद्राकर, टिकेंद्र चंद्राकर, टामिन वर्मा, कमलेश्वरी कोठारी, रामबाई लहरिया, रितु मिश्रा, सरला मडरिया सहित बड़ी संख्या में शिक्षक संवर्ग उपस्थित रहा।
