विकसित भारत जी-राम-जी अंतर्गत संभाग स्तरीय दो दिवसीय प्रशिक्षण आयोजित

विकसित भारत जी-राम-जी अंतर्गत संभाग स्तरीय दो दिवसीय प्रशिक्षण आयोजित

दुर्ग, 16 जून 2026। विकसित भारत जी-राम-जी अंतर्गत डीपीआरसी अंजोरा, दुर्ग में 15 एवं 16 जून 2026 को संभाग स्तरीय दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य विकसित भारत के संकल्पों एवं कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु अधिकारियों एवं कर्मचारियों की क्षमता संवर्धन करना तथा ग्राम स्तर पर योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के लिए आवश्यक कौशल विकसित करना है।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में दुर्ग संभाग के दुर्ग, बालोद, बेमेतरा, राजनांदगांव, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई एवं मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिलों के सहायक परियोजना अधिकारी, कार्यक्रम अधिकारी तथा जिला पंचायत के अधिकारी-कर्मचारी सहभागी बने।प्रशिक्षण के द्वितीय दिवस में विकसित ग्राम पंचायत योजना (वीजीपीवाई) मॉड्यूल पर विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया गया। इस मॉड्यूल का उद्देश्य ग्राम पंचायत स्तर पर वैज्ञानिक, सहभागी, साक्ष्य-आधारित एवं संतृप्ति आधारित विकास योजनाओं के निर्माण हेतु हितधारकों की क्षमता विकसित करना है।

इसके माध्यम से पंचायतों को संसाधनों के समुचित उपयोग, विभिन्न योजनाओं के प्रभावी अभिसरण तथा स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप विकास योजना तैयार करने के संबंध में मार्गदर्शन दिया गया।प्रशिक्षण के दौरान योजना निर्माण की संपूर्ण प्रक्रिया, सहभागी ग्रामीण मूल्यांकन (पीआरए), अंतराल विश्लेषण, संसाधन मानचित्रण, विकासोन्मुख अभिसरण रणनीतियों तथा जीआईएस जैसी डिजिटल तकनीकों के उपयोग की विस्तृत जानकारी दी गई। प्रतिभागियों को ग्राम पंचायतों की आवश्यकताओं एवं विकास संबंधी अंतरालों की पहचान, स्थिति विश्लेषण, परियोजनाओं की प्राथमिकता निर्धारण, वार्षिक एवं दीर्घकालिक योजनाओं के निर्माण तथा विभिन्न विभागों के साथ समन्वय स्थापित करने के संबंध में प्रशिक्षित किया गया।

विशेषज्ञों ने प्रशिक्षण के दौरान विकसित ग्राम पंचायत योजना के प्रमुख सिद्धांतों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि सहभागी योजना के अंतर्गत ग्राम सभा, वार्ड सभा, स्वयं सहायता समूहों एवं अन्य स्थानीय हितधारकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित कर समुदाय आधारित एवं समावेशी निर्णय प्रक्रिया को बढ़ावा दिया जाता है। वहीं साक्ष्य-आधारित योजना के तहत पीआरए, जीआईएस मानचित्रण, पीएम गतिशक्ति, सामाजिक-आर्थिक आंकड़ों एवं संसाधन मानचित्रण जैसे वैज्ञानिक उपकरणों का उपयोग कर स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप योजनाएं तैयार की जाती हैं।सहायक परियोजना अधिकारियों ने बताया कि प्रशिक्षण में विकासोन्मुखी अभिसरण की अवधारणा पर भी विशेष जोर दिया गया, जिसके माध्यम से विभिन्न विभागों, योजनाओं एवं संस्थागत संसाधनों का प्रभावी समन्वय कर उपलब्ध संसाधनों का सर्वोत्तम उपयोग सुनिश्चित किया जाता है।

साथ ही संतृप्ति दृष्टिकोण के तहत ग्राम पंचायत क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं एवं सेवाओं की सभी कमियों को दूर कर प्रत्येक परिवार एवं बस्ती तक विकास के लाभ पहुंचाने की रणनीति पर भी विस्तार से चर्चा की गई।प्रशिक्षण का उद्देश्य ग्राम पंचायतों को स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित, सशक्त एवं आत्मनिर्भर पंचायतों में रूपांतरित करना तथा ग्रामीण क्षेत्रों में समग्र एवं सतत विकास को बढ़ावा देना है।

विशेषज्ञों ने कहा कि विकसित ग्राम पंचायत योजना के सिद्धांत पंचायतों को सहभागी, समावेशी, साक्ष्य-आधारित एवं परिणामोन्मुख विकास की दिशा में सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

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