85 यूनिट खून स्टॉक में, फिर भी नहीं बच सकी दीपिका की जान; जांच के बाद 9 स्वास्थ्यकर्मियों को नोटिस

85 यूनिट खून स्टॉक में, फिर भी नहीं बच सकी दीपिका की जान; जांच के बाद 9 स्वास्थ्यकर्मियों को नोटिस

दुर्ग, जून 2026। जिला अस्पताल में सिकल सेल बीमारी से पीड़ित युवती दीपिका की मौत के मामले में जांच के बाद गंभीर लापरवाही उजागर हुई है। जांच रिपोर्ट में सामने आया है कि ब्लड बैंक में ‘ओ पॉजिटिव’ रक्त समूह की 85 यूनिट रक्त उपलब्ध होने के बावजूद मरीज को समय पर एक यूनिट खून नहीं मिल सका। मामले में लापरवाही पाए जाने पर 9 स्वास्थ्य कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

जानकारी के अनुसार, गंभीर हालत में जिला अस्पताल लाई गई दीपिका को तत्काल रक्त चढ़ाने की आवश्यकता थी। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने रक्त उपलब्ध होने के बावजूद डोनर लाने की शर्त रखी। इस बीच युवती के पिता रक्तदाता की तलाश में भटकते रहे और इलाज में देरी होती गई।मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर अभिजीत सिंह ने दो सदस्यीय जांच समिति गठित की थी। समिति ने अस्पताल की कार्यप्रणाली, ब्लड बैंक रिकॉर्ड और उपचार प्रक्रिया की विस्तृत जांच की। रिपोर्ट में कई स्तरों पर गंभीर लापरवाही और “अक्षम्य चूक” पाए जाने की बात सामने आई है।

जांच के आधार पर स्वास्थ्य विभाग ने 9 स्वास्थ्य कर्मचारियों को नोटिस जारी कर 48 घंटे के भीतर जवाब मांगा है। अधिकारियों के मुताबिक, ब्लड ट्रांसफ्यूजन से जुड़े निर्धारित प्रोटोकॉल का समुचित पालन नहीं किया गया, जिससे मरीज को समय पर आवश्यक उपचार नहीं मिल सका।परिजनों का कहना है कि ब्लड बैंक में पर्याप्त रक्त उपलब्ध होने के बावजूद नियमों और प्रक्रियाओं का हवाला देकर रक्त नहीं दिया गया। उनका आरोप है कि इसी देरी के कारण दीपिका की जान चली गई।इस घटना ने सरकारी अस्पतालों की स्वास्थ्य व्यवस्था, ब्लड बैंक संचालन और आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

स्वास्थ्य विभाग ने संकेत दिए हैं कि संबंधित कर्मचारियों के जवाब और आगे की जांच के आधार पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।फिलहाल इस मामले को लेकर स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मचा हुआ है और सभी की निगाहें आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं।

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