शिक्षा विभाग की अहम बैठक: TET पर शिक्षा मंत्री का बड़ा संकेत, शिक्षकों को मिल सकती है राहत; प्रमोशन पर फैसला अभी बाकी
रायपुर, 25 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ में शिक्षकों की TET अनिवार्यता को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच शिक्षा विभाग की अहम बैठक से शिक्षकों के लिए राहत की उम्मीद जगी है। बैठक में शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों की सेवा सुरक्षा को लेकर सरकार की मंशा स्पष्ट करते हुए कहा कि इस मामले में अलग-अलग विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।
हालांकि, पदोन्नति में TET की अनिवार्यता खत्म करने को लेकर फिलहाल कोई निर्णय नहीं हुआ है।बैठक की सबसे अहम बात यह रही कि TET का मुद्दा बैठक के निर्धारित एजेंडे में शामिल नहीं था, इसके बावजूद शिक्षा मंत्री ने स्वयं इस विषय को उठाया और अधिकारियों के सामने सरकार का पक्ष रखा। इससे यह संकेत मिला है कि सरकार लंबे समय से सेवा दे रहे उन शिक्षकों की समस्या को गंभीरता से देख रही है, जिनके सामने TET की अनिवार्यता के कारण सेवा सुरक्षा और पदोन्नति को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
विभागीय TET का विकल्प तलाश रही सरकार शिक्षा मंत्री के अनुसार सरकार TET को लेकर कई विकल्पों पर विचार कर रही है। इनमें विभागीय TET परीक्षा का विकल्प भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस संबंध में शिक्षा सचिव कमलप्रीत सिंह मध्यप्रदेश के अधिकारियों के संपर्क में हैं।सरकार का फोकस विशेष रूप से ऐसे शिक्षकों पर है, जो वर्षों से शिक्षा विभाग में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। यदि विभागीय स्तर पर TET जैसी परीक्षा की व्यवस्था तैयार होती है, तो लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों को सामान्य TET परीक्षा की तुलना में राहत मिलने की संभावना बन सकती है।मंत्री के रुख से यह भी संकेत मिला है कि सरकार केवल नियमों को आधार बनाकर निर्णय लेने के बजाय शिक्षकों की उम्र, सेवा अवधि और अनुभव को भी ध्यान में रखकर समाधान तलाशना चाहती है।
1998 बैच के शिक्षक का उदाहरण बैठक में शिक्षा मंत्री ने लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों की व्यावहारिक कठिनाइयों को समझाने के लिए 1998 बैच के शिक्षक का उदाहरण भी दिया।मंत्री का कहना था कि जो शिक्षक करीब तीन दशक से शिक्षा विभाग में सेवाएं दे रहे हैं, उनके लिए इस उम्र और लंबे अंतराल के बाद सामान्य TET परीक्षा की तैयारी करना और उसे पास करना आसान नहीं होगा। ऐसे में विभागीय स्तर पर परीक्षा अथवा कोई वैकल्पिक व्यवस्था अधिक व्यावहारिक हो सकती है।इसी वजह से मध्यप्रदेश में TET को लेकर अपनाए जा रहे विकल्पों और वहां की प्रक्रिया पर भी छत्तीसगढ़ सरकार की नजर है।
यदि मध्यप्रदेश में विभागीय TET को लेकर कोई प्रभावी व्यवस्था सामने आती है, तो छत्तीसगढ़ सरकार भी उसका अध्ययन कर अपने राज्य में इसी तरह की व्यवस्था लागू करने पर विचार कर सकती है।प्रमोशन में TET पर अभी कोई राहत नहींहालांकि, शिक्षकों की सबसे बड़ी चिंता पदोन्नति में TET की अनिवार्यता को लेकर है और इस मोर्चे पर बैठक से अभी कोई स्पष्ट राहत नहीं मिली है।बैठक में प्रमोशन के लिए TET की शर्त को समाप्त करने या उसमें छूट देने को लेकर कोई निर्णय घोषित नहीं किया गया।
ऐसे में फिलहाल पदोन्नति से जुड़े मामलों में स्थिति पहले जैसी ही बनी हुई है।यानी सरकार सेवा सुरक्षा को लेकर विकल्प तलाश रही है, लेकिन पदोन्नति में TET अनिवार्य रहेगा या नहीं, इस पर अभी अंतिम निर्णय का इंतजार करना होगा। जब तक सरकार की ओर से कोई अलग आदेश या नियम जारी नहीं होता, तब तक मौजूदा व्यवस्था के तहत ही प्रक्रिया आगे बढ़ने की संभावना है।व्याख्याताओं की पदोन्नति जल्दबैठक में शिक्षा मंत्री ने पदोन्नति को लेकर एक और महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने कहा कि व्याख्याताओं की पदोन्नति जल्द की जाएगी।इसके साथ ही कुछ प्राचार्यों को उप संचालक के पद पर पदोन्नत करने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाने की बात कही गई है। इससे शिक्षा विभाग में लंबे समय से पदोन्नति का इंतजार कर रहे अधिकारियों और शिक्षकों के बीच उम्मीद बढ़ी है।
हालांकि, इन पदोन्नतियों में TET की शर्त किस प्रकार लागू होगी, इस पर अभी स्पष्टता नहीं आई है। इसलिए शिक्षकों की नजर अब विभाग की ओर से जारी होने वाले आगामी आदेशों पर टिकी हुई है।TET एजेंडे में नहीं था, फिर भी मंत्री ने उठाया मुद्दाबैठक का सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक और प्रशासनिक संकेत यही माना जा रहा है कि TET निर्धारित एजेंडे का हिस्सा नहीं था, लेकिन शिक्षा मंत्री ने स्वयं इस विषय को अधिकारियों के सामने रखा।इससे यह संदेश गया है कि सरकार इस मुद्दे को केवल विभागीय औपचारिकता के रूप में नहीं देख रही, बल्कि लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों की समस्या के समाधान के लिए विकल्प तलाश रही है।सरकार का प्रयास शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के साथ-साथ ऐसी व्यवस्था बनाने का है, जिसमें अनुभवी शिक्षकों की वर्षों की सेवा और उनके अनुभव को भी महत्व दिया जा सके।
शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने पर भी जोर बैठक में TET और पदोन्नति के अलावा शिक्षा व्यवस्था से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर भी चर्चा हुई। शिक्षा मंत्री ने स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने पर विशेष जोर दिया।अधिकारियों को विद्यार्थियों और स्कूलों के लिए संचालित विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ शत-प्रतिशत पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाने के निर्देश दिए गए। साथ ही योजनाओं के क्रियान्वयन की नियमित निगरानी और स्कूल स्तर पर बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया।
अब शिक्षकों की नजर अगले आदेश परकुल मिलाकर शिक्षा विभाग की बैठक से TET को लेकर शिक्षकों को सेवा सुरक्षा के मोर्चे पर सकारात्मक संकेत जरूर मिले हैं। विभागीय TET अथवा अन्य विकल्पों पर सरकार के विचार से लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों में राहत की उम्मीद जगी है।लेकिन प्रमोशन में TET की अनिवार्यता अभी भी सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है। इस संबंध में बैठक में कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।ऐसे में फिलहाल तस्वीर साफ है—सेवा सुरक्षा को लेकर सरकार समाधान तलाश रही है, विभागीय TET का विकल्प सामने आ रहा है, व्याख्याताओं की पदोन्नति जल्द होने के संकेत हैं, लेकिन प्रमोशन में TET से छूट पर अभी फैसला बाकी है।अब शिक्षकों की नजर सरकार के अगले आदेश और विभागीय प्रक्रिया पर टिकी हुई है।
आने वाले दिनों में यदि विभागीय TET या किसी वैकल्पिक व्यवस्था को लेकर औपचारिक आदेश जारी होता है, तो हजारों शिक्षकों को बड़ी राहत मिल सकती है।
