जल संरक्षण का कोरिया मॉडल बना राष्ट्रीय उदाहरण, प्रधानमंत्री ने की सराहना
रायपुर, 29 मार्च 2026। छत्तीसगढ़ के कोरिया जिला में जल संरक्षण को जन आंदोलन का स्वरूप देने वाला “कोरिया मॉडल” अब राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुका है। इस पहल की सराहना स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने लोकप्रिय कार्यक्रम मन की बात में करते हुए इसे जनभागीदारी आधारित जल संरक्षण का प्रेरक उदाहरण बताया।राज्य के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भी इसे प्रदेश के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि जल संरक्षण को जनभागीदारी से सशक्त करना सरकार का संकल्प है।
उन्होंने कहा कि कोरिया मॉडल ने यह साबित कर दिया है कि सामूहिक प्रयासों से जल संकट का स्थायी समाधान संभव है।जनभागीदारी से बना आंदोलनकोरिया जिले में “कैच द रेन” और “मोर गांव मोर पानी महा अभियान” के अंतर्गत “आवा पानी झोंकी” अभियान चलाया गया। इस पहल ने जल संरक्षण को केवल सरकारी योजना तक सीमित न रखकर जन-जन का अभियान बना दिया।5% मॉडल की विशेषता“जल संचय जन भागीदारी अभियान” के तहत लागू 5% मॉडल में किसानों ने अपनी भूमि का 5 प्रतिशत हिस्सा जल संरचनाओं के लिए समर्पित किया। इसके अंतर्गत सोखता गड्ढे, छोटी सीढ़ीनुमा संरचनाएं और मनरेगा के माध्यम से जल संरक्षण कार्य किए गए।
सामुदायिक और वैज्ञानिक समन्वयइस अभियान में महिलाओं ने ‘नीर नायिका’ और युवाओं ने ‘जल दूत’ बनकर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ग्राम सभाओं के माध्यम से विकेंद्रीकृत योजना को लागू किया गया, जिससे ग्रामीण स्वयं इस अभियान के संचालक बने।उल्लेखनीय उपलब्धियाँवर्ष 2025 में जिले में लगभग 2.8 मिलियन क्यूबिक मीटर जल का भूजल में पुनर्भरण हुआ। यह लगभग 230 बड़े तालाबों और 1800 से अधिक डबरियों के बराबर है।केंद्रीय भूजल बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार जिले में भूजल स्तर में 5.41 मीटर की वृद्धि दर्ज की गई, जो इस मॉडल की सफलता को दर्शाता है।
2026 में तेज प्रगतिवर्तमान में जिले में 20,612 से अधिक जल संरक्षण कार्य पूर्ण या प्रगति पर हैं, जिनमें 17,229 सामुदायिक और 3,383 मनरेगा आधारित कार्य शामिल हैं।कलेक्टर का बयानजिला कलेक्टर श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी ने कहा कि “कोरिया मॉडल की सफलता का मूल आधार जनभागीदारी है। जब समाज स्वयं आगे आता है, तो परिणाम स्थायी और व्यापक होते हैं।”राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती पहचानकेंद्रीय जलशक्ति मंत्री द्वारा भी इस मॉडल को अन्य राज्यों में लागू किए जाने योग्य बताया गया है। इससे स्पष्ट है कि कोरिया मॉडल अब देशभर में जल संरक्षण के लिए प्रेरणा बनता जा रहा है।
निष्कर्ष कोरिया मॉडल यह सिद्ध करता है कि जनभागीदारी, वैज्ञानिक योजना और प्रशासनिक नेतृत्व के समन्वय से जल संरक्षण को एक स्थायी जन आंदोलन में बदला जा सकता है—और यही मॉडल अब राष्ट्रीय स्तर पर अपनाने की दिशा में अग्रसर है।
