कृषि तालाब से बदली ममता चंद्राकर के खेत की तस्वीर

कृषि तालाब से बदली ममता चंद्राकर के खेत की तस्वीर

-“विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) की परिसंपत्ति बनी सिंचाई, समृद्धि और आत्मनिर्भरता का आधार

दुर्ग, 22 जुलाई 2026/ “विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) के तहत निर्मित परिसंपत्तियां केवल रोजगार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ग्रामीण परिवारों की आजीविका को स्थायी आधार भी प्रदान कर रही हैं। ग्राम पंचायत अंडा की हितग्राही श्रीमती ममता चंद्राकर एवं श्री मनोज चंद्राकर इसका प्रेरणादायक उदाहरण हैं। उनके खेत में मनरेगा के अंतर्गत निर्मित कृषि तालाब ने खेती की तस्वीर ही बदल दी है।

ग्राम पंचायत अंडा मुख्यतः कृषि प्रधान गांव है, जहां अधिकांश परिवार खेती और कृषि मजदूरी पर निर्भर हैं। वर्षों से बारिश पर आधारित खेती और लगातार गिरते भूजल स्तर के कारण किसानों को सिंचाई के लिए कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। ममता चंद्राकर का परिवार भी इसी समस्या से जूझ रहा था। खेत में पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं होने के कारण फसल उत्पादन सीमित रहता था और परिवार की आय भी प्रभावित होती थी। गाँव में आयोजित ग्राम सभा में “विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) के तहत व्यक्तिगत कृषि तालाब निर्माण योजना की जानकारी दी गई।

बताया गया कि कृषि तालाब वर्षा जल संरक्षण का प्रभावी माध्यम है, जिससे सिंचाई सुविधा बढ़ने के साथ-साथ मत्स्य पालन और अतिरिक्त फसल उत्पादन की संभावनाएं भी विकसित होती हैं। यह जानकारी ममता चंद्राकर के लिए उम्मीद की नई किरण बनी। उन्होंने अपने खेत में कृषि तालाब निर्माण के लिए आवेदन किया, जिसे ग्राम सभा की अनुशंसा पर स्वीकृति मिल गई।


रोजगार सहायक श्री भूपेन्द्र चंद्राकर के अनुसार, वर्ष 2025-26 में इस कार्य को ₹2.99 लाख की प्रशासनिक स्वीकृति प्राप्त हुई। इसमें ₹2.79 लाख मजदूरी तथा ₹0.20 लाख सामग्री मद का प्रावधान था। कार्य 27 जनवरी 2026 को प्रारंभ हुआ और निर्धारित समय में गुणवत्तापूर्वक पूर्ण किया गया। निर्माण कार्य के दौरान 1073 मानव दिवस का रोजगार सृजित हुआ, जिससे स्थानीय श्रमिकों को रोजगार मिलने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिली। वहीं तकनीकी सहायक श्री यमन बघेल ने बताया कि कार्य प्रारंभ होने से पहले स्थल चयन और ले-आउट तैयार किया गया।

इसके बाद वैज्ञानिक तरीके से तालाब की खुदाई कराई गई। ग्राम पंचायत अंडा ने क्रियान्वयन एजेंसी के रूप में पूरे कार्य का सफल संचालन किया तथा गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा। आज कृषि तालाब तैयार होने के बाद ममता चंद्राकर के खेत में वर्षा जल का संरक्षण संभव हो गया है। इससे पूरे वर्ष सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध रहने की संभावना बढ़ गई है। अब वे धान के साथ दलहन, तिलहन एवं अन्य फसलों की खेती की योजना बना रही हैं। भविष्य में तालाब में मत्स्य पालन कर अतिरिक्त आय अर्जित करने का अवसर भी मिलेगा। इसके साथ ही क्षेत्र में भूजल स्तर सुधारने और जल संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।


हितग्राही श्रीमती ममता चंद्राकर बताती हैं “पहले सिंचाई के लिए पानी की बहुत परेशानी होती थी। बारिश का पानी बहकर निकल जाता था और खेती पूरी तरह मौसम पर निर्भर रहती थी। मनरेगा से कृषि तालाब बनने के बाद अब पानी का संरक्षण हो सकेगा। इससे खेती आसान होगी, फसल उत्पादन बढ़ेगा और भविष्य में मत्स्य पालन से अतिरिक्त आय भी मिलेगी।” आज ममता चंद्राकर का कृषि तालाब केवल उनके खेत की सिंचाई का साधन नहीं, बल्कि पूरे गांव के किसानों के लिए प्रेरणा बन गया है। कई किसान इस मॉडल को देखकर अपने खेतों में भी जल संरक्षण संरचनाएं बनाने के लिए आगे आ रहे हैं। यह पहल बताती है कि यदि वर्षा जल का वैज्ञानिक ढंग से संरक्षण किया जाए, तो खेती को अधिक लाभकारी, टिकाऊ और आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है।

“विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) के माध्यम से निर्मित यह कृषि तालाब जल संरक्षण, रोजगार सृजन और किसानों की आर्थिक सशक्तता का उत्कृष्ट उदाहरण है। यह कहानी इस बात का प्रमाण है कि जब सरकारी योजनाएं सही हितग्राहियों तक प्रभावी ढंग से पहुंचती हैं, तब वे केवल निर्माण कार्य नहीं करतीं, बल्कि परिवारों के जीवन में समृद्धि, आत्मविश्वास और उज्ज्वल भविष्य की नई शुरुआत करती हैं।

Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

× How can I help you?