छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: पूर्व सीएम भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल की ₹61.20 करोड़ की संपत्ति ईडी ने अटैच की
रायपुर 13 नवंबर 2025। प्रवर्तन निदेशालय (ED) रायपुर जोनल ऑफिस ने 10 नवंबर 2025 को छत्तीसगढ़ शराब घोटाले के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पुत्र चैतन्य बघेल की ₹61.20 करोड़ की संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया है। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत की गई है।कुल 61.20 करोड़ की संपत्ति अटैचईडी द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, अटैच की गई संपत्तियों में—364 प्लॉट और कृषि भूमि सहित अचल संपत्तियां: ₹59.96 करोड़ बैंक बैलेंस और फिक्स्ड डिपॉजिट जैसी चल संपत्तियां: ₹1.24 करोड़इन सभी संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया गया है।
छत्तीसगढ़ शराब घोटाले की पृष्ठभूमिईडी की जांच एसीबी/ईओडब्ल्यू रायपुर द्वारा दर्ज एफआईआर पर आधारित है, जिसमें भारतीय दंड संहिता (IPC) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत मामला दर्ज किया गया था।जांच में खुलासा हुआ कि राज्य के शराब घोटाले से राज्य को हजारों करोड़ का नुकसान हुआ और लगभग ₹2500 करोड़ की अवैध कमाई (Proceeds of Crime) कुछ अधिकारियों, व्यापारियों और राजनीतिक व्यक्तियों तक पहुंचाई गई। ईडी की जांच में बड़ा खुलासा: “घोटाले के शीर्ष पर थे चैतन्य बघेल”ईडी की जांच में यह सामने आया है कि चैतन्य बघेल, जो पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पुत्र हैं, शराब सिंडिकेट के शीर्ष स्थान पर थे।
उनकी हैसियत और प्रभाव के कारण वही सिंडिकेट के संचालन, धन संग्रह और वितरण से जुड़े सभी निर्णयों के केंद्र में थे।ईडी के अनुसार,“चैतन्य बघेल ही अवैध धन (POC) के हिसाब-किताब संभालते थे और उन्हीं के निर्देश पर पूरे नेटवर्क का संचालन होता था।”रियल एस्टेट के जरिये अवैध धन को वैध दिखाने का आरोप जांच में यह भी पाया गया कि बघेल ने शराब घोटाले से प्राप्त धन को अपने रियल एस्टेट कारोबार के माध्यम से लेयरिंग (Layering) कर वैध दिखाने की कोशिश की।
उन्होंने इस धन का इस्तेमाल अपनी रियल एस्टेट परियोजना “विठ्ठल ग्रीन” (Vitthal Green) में किया, जो उनकी स्वामित्व वाली फर्म एम/एस बघेल डेवलपर्स के नाम से संचालित होती है। गिरफ्तारी और आगे की जांच ईडी ने चैतन्य बघेल को 18 जुलाई 2025 को गिरफ्तार किया था और वे फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।इससे पहले, इस मामले में पूर्व आईएएस अधिकारी अमित टूटेजा, अरविंद सिंह, त्रिलोक सिंह ढिल्लन, अनवर ढेबर, अरुण पति इनपाठी (ITS) और पूर्व आबकारी मंत्री एवं विधायक कवासी लखमा की भी गिरफ्तारी हो चुकी है।ईडी ने बताया कि यह ₹61.20 करोड़ की ताजा कार्रवाई पहले की गई कार्रवाई का हिस्सा है।इससे पहले भी लगभग ₹215 करोड़ की संपत्तियां अटैच की जा चुकी हैं।एजेंसी ने कहा है कि “जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में और भी खुलासे संभव हैं।”
