महामंडलेश्वर संत कालीदास जी महाराज ने मासक्षमण तपस्वी श्री टीकाराम जी पराजुली का करवाया पारणा
राष्ट्रसंत डॉ. मणिभद्र मुनि जी महाराज के दर्शनार्थ दुर्ग पहुंचे महामंडलेश्वर कालीदास जी महाराज
दुर्ग। जय आनंद मधुकर रतन भवन, बांधा तालाब दुर्ग में बुधवार को धार्मिक एवं आध्यात्मिक वातावरण भक्तिमय रहा। राष्ट्रसंत मानव मिलन संस्थापक डॉ. मणिभद्र मुनि जी महाराज के दर्शनार्थ दुर्ग पहुंचे महामंडलेश्वर संत श्री कालीदास जी काली महाराज ने मासक्षमण जैसी कठिन तपस्या पूर्ण करने वाले तपस्वी श्री टीकाराम जी पराजुली का पारणा करवाया तथा उनकी तपस्या की अनुमोदना करते हुए अभिनंदन किया।
महामंडलेश्वर श्री कालीदास जी महाराज के आगमन पर श्रमण संघ परिवार की विभिन्न संस्थाओं एवं पदाधिकारियों द्वारा आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन किया गया। इस धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहे।मासक्षमण तपस्वी श्री टीकाराम जी पराजुली ने संयम, साधना और आत्मबल के साथ कठिन तपस्या पूर्ण की। इस अवसर पर महामंडलेश्वर श्री कालीदास जी महाराज ने कहा कि तपस्या केवल शरीर को कष्ट देने का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, संयम और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग है।
ऐसे तपस्वियों की तपस्या समाज में त्याग और संयम की भावना को मजबूत करती है।महामंडलेश्वर जी की आगवानी एवं स्वागत के लिए दुर्ग सांसद श्री विजय बघेल तथा रायपुर ग्रामीण विधायक श्री पुणेदु मिश्रा एवं श्री लाभचंद बाफना विशेष रूप से उपस्थित रहे। उनकी उपस्थिति से आयोजन की गरिमा और बढ़ गई।कार्यक्रम के दौरान श्रमण संघ परिवार के विभिन्न मंडलों, संस्थाओं एवं समाजजनों ने महामंडलेश्वर श्री कालीदास जी महाराज का स्वागत किया।
वहीं राष्ट्रसंत डॉ. मणिभद्र मुनि जी महाराज के सानिध्य में चल रहे धार्मिक एवं तप आराधना के क्रम की सराहना की गई।जय आनंद मधुकर रतन भवन परिसर धर्म, तप, त्याग और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर नजर आया। उपस्थित श्रद्धालुओं ने मासक्षमण तपस्वी श्री टीकाराम जी पराजुली की तपस्या की अनुमोदना करते हुए वर्धमान सेवा मंच द्वारा प्रभावना वितरित की गई तथा उनके उत्तम स्वास्थ्य एवं आध्यात्मिक प्रगति की मंगलकामना की।
आयोजन को सफल बनाने में श्रमण संघ परिवार के सदस्यों के साथ धर्मचंद लोढ़ा, प्रवीण श्रीश्रीमाल, निर्मल बाफना, निर्मल रतन बोहरा, अंजू सुराणा, राकेश संचेती, उत्तम भंडारी, अशोक रतन बोहरा एवं रजत सुराणा का विशेष सहयोग रहा।
