टीईटी आधारित पदोन्नति के मुद्दे पर शिक्षक संगठनों में दो फाड़ अन्य शिक्षक संगठनों से टीईटी उत्तीर्ण शिक्षकों ने दिया सामूहिक इस्तीफा, 15 सितंबर तक प्रक्रिया पूरी नहीं हुई तो आमरण अनशन की चेतावनी
रायपुर। टीईटी आधारित पदोन्नति के मुद्दे को लेकर छत्तीसगढ़ के शिक्षक संगठनों के बीच मतभेद अब खुलकर सामने आने लगे हैं। टीईटी उत्तीर्ण शिक्षकों ने अपने पूर्व शिक्षक संगठनों से सामूहिक रूप से इस्तीफा देकर अलग रुख अपनाने का ऐलान किया है। शिक्षकों का कहना है कि वर्तमान में चल रहे सुप्रीम कोर्ट के आदेश, एनसीटीई के निर्देश और छत्तीसगढ़ राजपत्र 2026 के अनुरूप टीईटी आधारित पदोन्नति प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाना चाहिए।

टीईटी उत्तीर्ण शिक्षक कल्याण संघ के प्रदेश संयोजक के नेतृत्व

में टीईटी उत्तीर्ण शिक्षक आज डीपीआई तथा अपने-अपने संयुक्त संचालक, शिक्षा संभाग (जेडी) कार्यालयों के सामने उपस्थित हुए और विभिन्न शिक्षक संगठनों की सदस्यता से सामूहिक इस्तीफा देने की घोषणा की।10-15 वर्षों से संगठनों से जुड़े थे शिक्षकप्रदेश संयोजक ने कहा कि टीईटी उत्तीर्ण अनेक शिक्षक पिछले 10 से 15 वर्षों से छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक फेडरेशन, नवीन शिक्षक संघ, शालेय शिक्षक संघ और छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन जैसे संगठनों से जुड़े रहे हैं।
कई शिक्षक इन संगठनों में पदाधिकारी की जिम्मेदारी भी निभा चुके हैं।उन्होंने आरोप लगाया कि अब टीईटी उत्तीर्ण शिक्षकों के पदोन्नति अधिकार को लेकर उनके ही संगठनों के भीतर मतभेद की स्थिति बन गई है। इसी से क्षुब्ध होकर टीईटी उत्तीर्ण शिक्षकों ने पुराने संगठनों की सदस्यता छोड़ने का निर्णय लिया है।30 अगस्त की समय-सीमा पर उठाए सवालशिक्षकों का आरोप है कि शासन द्वारा सभी जेडी और डीईओ कार्यालयों को पदोन्नति प्रक्रिया 30 अगस्त 2026 तक पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन प्रक्रिया को लेकर अधिकारियों में अपेक्षित गंभीरता दिखाई नहीं दे रही है।
टीईटी उत्तीर्ण शिक्षकों ने मांग की है कि निर्धारित समय-सीमा के भीतर पदोन्नति प्रक्रिया को नियमानुसार पूरा किया जाए।पदोन्नति रोकने के लिए आंदोलन पर भी नाराजगीटीईटी उत्तीर्ण शिक्षकों का कहना है कि टीईटी अनुत्तीर्ण वर्ग द्वारा पदोन्नति प्रक्रिया को रोकने के लिए हड़ताल और घेराव के माध्यम से शासन पर दबाव बनाने का प्रयास किया जा रहा है। इसे लेकर टीईटी उत्तीर्ण शिक्षकों में नाराजगी बढ़ रही है।शिक्षकों का कहना है कि पदोन्नति प्रक्रिया को किसी भी प्रकार के दबाव या आंदोलन के कारण बाधित नहीं किया जाना चाहिए तथा शासन को नियमों के अनुसार निर्णय लेना चाहिए।
15 सितंबर तक प्रक्रिया पूरी नहीं हुई तो आमरण अनशन टीईटी उत्तीर्ण शिक्षक कल्याण संघ ने शासन को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि 15 सितंबर 2026 तक टीईटी आधारित पदोन्नति प्रक्रिया पूर्ण नहीं की गई, तो प्रदेश के सभी संभागों के जेडी कार्यालयों के सामने टीईटी उत्तीर्ण शिक्षक धरना देकर आमरण अनशन शुरू करने के लिए बाध्य होंगे। संघ ने इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होने की बात कही है।शिक्षक संगठनों की एकजुटता पर उठे सवाल टीईटी उत्तीर्ण शिक्षकों के मूल शिक्षक संगठनों से अलग होने के बाद पदोन्नति का विरोध कर रहे शिक्षक संगठनों की एकजुटता पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
खास बात यह है कि कुछ शिक्षक संगठनों के पदाधिकारी स्वयं टीईटी उत्तीर्ण बताए जा रहे हैं। ऐसे में अब सवाल उठ रहा है कि संबंधित पदाधिकारी पदोन्नति प्रक्रिया में स्वयं भाग लेंगे या अपने संगठनों के विरोध के साथ खड़े रहेंगे।टीईटी उत्तीर्ण शिक्षकों का कहना है कि उनका आंदोलन किसी संगठन के खिलाफ नहीं, बल्कि अपने पदोन्नति अधिकार और नियमों के अनुरूप प्रक्रिया पूर्ण कराने के लिए है।
आने वाले दिनों में यह मुद्दा शिक्षक संगठनों और शासन के बीच और अधिक गरमाने की संभावना है।

