शिक्षकों के लिए TET बनी राष्ट्रीय आपदा, समाधान के लिए महासंघ की एंट्री 27 अगस्त के आंदोलन में होगा शिक्षक हित का शंखनाद
रायपुर। शिक्षकों की सेवा एवं पदोन्नति में TET की बाध्यता राष्ट्रीय आपदा से कम नहीं है। TET की बाध्यता के समाधान, सहायक शिक्षकों की वेतन विसंगति, प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा अवधि की गणना तथा विभागीय D.Ed./B.Ed. प्रशिक्षण के लिए ब्रिज कोर्स की मांग को लेकर चल रहे शिक्षक आंदोलन को अब छत्तीसगढ़ संयुक्त शिक्षक महासंघ ने भी खुला समर्थन दे दिया है।आज आयोजित ऑनलाइन गूगल मीट में छत्तीसगढ़ के 11 से अधिक शिक्षक संगठनों के प्रांताध्यक्षों एवं प्रतिनिधियों ने मैराथन चर्चा की।
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि आगामी 27 अगस्त के शिक्षक आंदोलन में महासंघ पूर्ण सहभागिता निभाएगा और शिक्षक हित में मजबूती से शंखनाद करेगा।*बैठक में कृष्ण कुमार नवरंग, प्रांताध्यक्ष गवर्नमेंट एम्पलाइज वेलफेयर एसोसिएशन छत्तीसगढ, राज नारायण द्विवेदी, प्रांताध्यक्ष प्रदेश शिक्षक महासंघ; शंकर साहू प्रदेश अध्यक्ष छत्तीसगढ़ प्रदेश शासकीय शिक्षक फेडरेशन, विष्णु प्रसाद साहू, प्रदेश अध्यक्ष छत्तीसगढ़ व्याख्याता वाणिज्य विकास संघ, विक्रम राय प्रदेश अध्यक्ष छत्तीसगढ़ समन्वयक संघ, धर्मदास बंजारे प्रदेश अध्यक्ष छत्तीसगढ़ प्रदेश विद्यालयीन शिक्षक संघ, चेतन दास बघेल प्रदेश अध्यक्ष प्रदेश शिक्षक सेवी कल्याण संघ छत्तीसगढ़, कमलदास मूरचले प्रदेश अध्यक्ष संयुक्त प्रधान पाठक कल्याण संघ, प्रीतम कोशले प्रदेश अध्यक्ष ट्राइबल एजुकेशन एकीकृत शिक्षक संघ छत्तीसगढ़, राजकिशोर तिवारी प्रदेश अध्यक्ष प्रदेश शिक्षक कल्याण संघ,अनिल टोप्पो, छत्तीसगढ़ राज्य स्तरीय शिक्षक संघ, शिव सारथी विधि सलाहकार; छोटेलाल साहू एवं नरेंद्र जांगड़े, महासंघ प्रवक्ता सहित अनेक शिक्षक प्रतिनिधि शामिल हुए।*चार प्रमुख मांगों पर स्पष्ट रुखमहासंघ ने शिक्षक हित में अपना सामूहिक रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि—
1. TET की बाध्यता समाप्त की जाए, शिक्षकों की सेवा एवं पदोन्नति में TET की बाध्यता को तत्काल समाप्त कर हजारों शिक्षकों के बंद हो चुके भविष्य के रास्ते खोले जाएं।
2. प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा अवधि की गणना हो, शिक्षकों को उनकी वास्तविक प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा अवधि की गणना का लाभ दिया जाए, ताकि वरिष्ठता एवं अन्य सेवा लाभों में न्याय सुनिश्चित हो सके।
3. सहायक शिक्षकों की वेतन विसंगति दूर हो, सहायक शिक्षकों की लंबे समय से लंबित वेतन विसंगति का तत्काल समाधान कर उन्हें न्यायसंगत वेतनमान प्रदान किया जाए।
4. विभागीय D.Ed./B.Ed. प्रशिक्षण के लिए ब्रिज कोर्स कराया जाए, शिक्षकों के सामने उत्पन्न प्रशिक्षण एवं शैक्षणिक योग्यता संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए विभागीय स्तर पर ब्रिज कोर्स की व्यवस्था की जाए।
आंदोलन किसी एक संगठन का नहीं, पूरे शिक्षक समाज कामहासंघ ने कहा कि 27 अगस्त का आंदोलन किसी एक संगठन की लड़ाई नहीं है। यह प्रदेश के हजारों शिक्षकों के सेवा अधिकार, वेतन, पदोन्नति, वरिष्ठता और भविष्य से जुड़ा साझा संघर्ष है।इसलिए प्राथमिक शिक्षक से लेकर प्रधान पाठक, व्याख्याता, शिक्षक एवं प्राचार्य तक सभी शिक्षकों को संगठनात्मक सीमाओं से ऊपर उठकर इस आंदोलन में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करनी चाहिए।
महासंघ ने कहा कि सरकार को शिक्षकों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए सकारात्मक निर्णय करना चाहिए। लंबे समय से लंबित इन मांगों की अनदेखी से शिक्षक समुदाय में असंतोष बढ़ रहा है।27 अगस्त को होगा शंखनादछत्तीसगढ़ संयुक्त शिक्षक महासंघ ने प्रदेश के समस्त शिक्षक साथियों से अपील की है कि 27 अगस्त को होने वाले आंदोलन में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर शिक्षक एकता का परिचय दें।
महासंघ ने स्पष्ट किया कि वह वर्तमान में चल रहे शिक्षक आंदोलन को खुला समर्थन देते हुए पूर्ण सहभागिता करेगा और शिक्षक हित की जायज मांगों के समाधान तक लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण संघर्ष में अपनी भूमिका निभाएगा।
छत्तीसगढ़ संयुक्त शिक्षक महासंघ11 से अधिक शिक्षक संगठनों का संयुक्त मंच शिक्षक एकता — शिक्षक सम्मान — शिक्षक अधिकार
