बदलता छत्तीसगढ़: वनोपज की चमक से संवरती ग्रामीण अर्थव्यवस्थाहरा सोना बन रहा आत्मनिर्भरता की नई पहचान
रायपुर। Chhattisgarh आज अपनी समृद्ध वन संपदा, दूरदर्शी नीतियों और ग्रामीण सहभागिता के दम पर देश में वनोपज आधारित अर्थव्यवस्था का नया मॉडल प्रस्तुत कर रहा है। “हर्बल स्टेट” के रूप में पहचान बना चुका छत्तीसगढ़ अब जंगलों से मिलने वाले “ग्रीन गोल्ड” को स्थानीय उपयोग से आगे बढ़ाकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचा रहा है। इससे न केवल वन संरक्षण को मजबूती मिल रही है, बल्कि ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में आर्थिक समृद्धि की नई कहानी भी लिखी जा रही है।
वनोपज बना ग्रामीण विकास का आधारराज्य के वनों में तेंदूपत्ता, बांस, लाख, शहद, महुआ और दुर्लभ औषधीय पौधों की भरपूर उपलब्धता है। सागौन, साल, बीजा और शीशम जैसे बहुमूल्य वृक्ष छत्तीसगढ़ की वन संपदा को और समृद्ध बनाते हैं। इन्हीं संसाधनों को आधुनिक तकनीक और प्रसंस्करण के जरिए उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों में बदला जा रहा है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है।जामगांव एम की केंद्रीय प्रसंस्करण इकाई बनी परिवर्तन का केंद्रमुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai और वन मंत्री Kedar Kashyap द्वारा लोकार्पित जामगांव एम की केंद्रीय प्रसंस्करण इकाई वनोपज आधारित उद्योगों के लिए नई उम्मीद बनकर उभरी है।
यहां आंवला, बेल, गिलोय और अश्वगंधा जैसी औषधीय वन उपजों से जूस, कैंडी, पाउडर और हर्बल उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं।20 हजार मीट्रिक टन क्षमता वाले अत्याधुनिक गोदामों की सुविधा से उपज का सुरक्षित भंडारण संभव हो सका है, जिससे संग्राहकों को बाजार की अनिश्चितताओं से राहत मिल रही है।“छत्तीसगढ़ हर्बल्स” को मिल रही राष्ट्रीय पहचानराज्य सरकार का आधिकारिक ब्रांड “छत्तीसगढ़ हर्बल्स” अब गुणवत्ता और शुद्धता का प्रतीक बन चुका है। राज्य में संजीवनी स्टोरों की संख्या 30 से बढ़कर 1500 से अधिक हो गई है।
वहीं ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से अब राज्य के हर्बल उत्पाद देशभर में पहुंच रहे हैं।भृंगराज तेल, नीम तेल, च्यवनप्राश, शुद्ध शहद, बेल शर्बत और विभिन्न आयुर्वेदिक उत्पादों को बाजार में अच्छी मांग मिल रही है।महिला स्व-सहायता समूह बने आर्थिक बदलाव की ताकतइस पूरी व्यवस्था की सबसे मजबूत कड़ी महिला स्व-सहायता समूह हैं। आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं मशीन संचालन, पैकेजिंग और गुणवत्ता परीक्षण जैसे कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। इससे महिलाओं की आय बढ़ी है, गांवों से पलायन में कमी आई है और आर्थिक आत्मनिर्भरता को नई दिशा मिली है।
हर्बल एक्सट्रैक्शन यूनिट से वैश्विक बाजार में बढ़ी पहुंचवर्ष 2025 में स्थापित हर्बल एक्सट्रैक्शन यूनिट ने छत्तीसगढ़ को हर्बल मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में नई पहचान दी है। यहां तैयार होने वाले औषधीय अर्कों की मांग अंतरराष्ट्रीय फार्मास्युटिकल और वेलनेस इंडस्ट्री में तेजी से बढ़ रही है।अब छत्तीसगढ़ केवल कच्चा माल उपलब्ध कराने वाला राज्य नहीं, बल्कि मूल्यवर्धित हर्बल उत्पादों का प्रमुख निर्माता बनकर उभर रहा है।
वनोपज से समृद्धि की नई कहानीछत्तीसगढ़ की यह पहल पर्यावरण संरक्षण, ग्रामीण रोजगार, महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था का बेहतरीन उदाहरण बनती जा रही है। “हरा सोना” अब राज्य के गांवों में नई उम्मीद, नई आय और नए भविष्य की रोशनी लेकर आ रहा है।
