राजनांदगांव में धान घोटाले का बड़ा खुलासा सूखत के नाम पर करोड़ों का खेल, 61 हजार क्विंटल धान गायब

राजनांदगांव में धान घोटाले का बड़ा खुलासा सूखत के नाम पर करोड़ों का खेल, 61 हजार क्विंटल धान गायब 85 समितियों में 19 करोड़ के धान की कमी, 24 सोसायटियां जांच के दायरे में राजनांदगांव जिले में धान खरीदी और उठाव के बाद बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। सूखत के नाम पर समितियों में भारी गड़बड़ी करते हुए करीब 61 हजार क्विंटल धान गायब कर दिए जाने का मामला उजागर हुआ है। प्रारंभिक जांच में करोड़ों रुपए के गोलमाल की आशंका जताई जा रही है।

प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार जिले की 85 सोसायटियों में करीब 19 करोड़ रुपए मूल्य का धान शॉर्टेज में दिखाया गया है, जबकि 24 समितियां गंभीर रूप से संदेह के घेरे में हैं।जानकारी के मुताबिक सीजन 2025-26 में धान उठाव पूर्ण होने के बाद जब स्टॉक और स्क्रैप का मिलान किया गया, तब जिलेभर में कुल 61,493 क्विंटल से अधिक धान की कमी सामने आई। इस कमी को “सूखत” बताकर दर्ज करने की कोशिश की गई, जबकि सामान्य परिस्थितियों में धान में केवल 1 से 2 प्रतिशत तक सूखत मान्य होती है।

कई समितियों में हजारों क्विंटल धान का शॉर्टेजजिले की कई समितियों में भारी अनियमितताएं सामने आई हैं।घुमका समिति में 2,357 क्विंटल धान की कमी दर्ज हुई।मुसराकला में 2,301 क्विंटल धान शॉर्टेज बताया गया।सीतागोटा/कनेरी में 1,899 क्विंटल धान कम पाया गया।सड़क चिरचारी (खोभा)/कुहीकला में 1,755 क्विंटल की कमी सामने आई।बम्हनी चारभांठा में 1,592 क्विंटल धान सूखत में दर्शाया गया।लालूटोला में 1,507 क्विंटल तथा ढारा में 1,464 क्विंटल धान की कमी रिकॉर्ड में दर्ज की गई है।

चौंकाने वाली बात यह है कि कई समितियों में धान का पूरा उठाव हो चुका है और बारदानों की संख्या शून्य दिखाई गई है, लेकिन रिकॉर्ड में भारी मात्रा में धान की अनुमानित कमी बनी हुई है। इससे पूरे मामले में बड़े स्तर पर उठाव घोटाले की आशंका गहरा गई है।जांच में खुला फर्जीवाड़ा, FIR भी दर्जप्रशासन ने अब तक तीन से चार समितियों की जांच की है, जहां गंभीर गड़बड़ियां सामने आने पर एफआईआर दर्ज कराई गई है। सूत्रों के अनुसार अभी भी 24 ऐसी समितियां हैं, जहां इसी प्रकार का फर्जीवाड़ा होने की आशंका है।

यदि व्यापक जांच की जाती है तो और बड़े खुलासे संभव हैं।शासन पर अतिरिक्त बोझधान की कथित कमी की भरपाई के लिए जिले में करीब 1.53 लाख अतिरिक्त बारदानों की आवश्यकता बताई जा रही है, जिससे सरकारी खजाने पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा। सवाल यह उठ रहा है कि क्या इतनी बड़ी मात्रा में धान वास्तव में सूखत में गया या फिर सुनियोजित तरीके से उठाव और रिकॉर्ड में हेराफेरी की गई।कांग्रेस ने उठाई EOW जांच की मांगजिला कांग्रेस कोषाध्यक्ष राकेश जोशी ने मामले की आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) से जांच कराने की मांग की है।

उन्होंने आरोप लगाया कि सूखत की आड़ में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है और इसमें सहकारी बैंक स्तर तक संरक्षण मिला हो सकता है।वहीं जितेन्द्र यादव ने कहा कि जिन समितियों में गड़बड़ी सामने आई है वहां प्रशासनिक जांच कराई गई है तथा दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।

आगे भी जांच जारी रहेगी और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की

Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

× How can I help you?