“बेटी यश बढ़ाने आती है” — लिटिया सेमरिया में चल रही शिव महापुराण कथा में आचार्य डॉ विक्रांत दुबे का भावुक संदेश

“बेटी यश बढ़ाने आती है” — लिटिया सेमरिया में चल रही शिव महापुराण कथा में आचार्य डॉ विक्रांत दुबे का भावुक संदेश

ग्राम लिटीया सिमरिया में आयोजित पावन शिवपुराण कथा के चौथे दिन भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत वातावरण देखने को मिला। कथावाचक आचार्य डॉ विक्रांत दुबे ने माता पार्वती के जन्म, सनकादिक ऋषियों के श्राप और शिव विवाह प्रसंग का अत्यंत मार्मिक वर्णन किया। उनके आध्यात्मिक एवं भावपूर्ण कथन से कथा पंडाल में उपस्थित सैकड़ों श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गए।

आचार्य विक्रांत दुबे ने बताया कि प्राचीन काल में पित्रों की कन्याओं को सनकादिक ऋषियों द्वारा श्राप दिया गया था, जिसके फलस्वरूप उन्हें पृथ्वी पर सामान्य मनुष्य के रूप में जन्म लेना पड़ा। इनमें से एक कन्या हिमाचल की पत्नी मैना के रूप में, दूसरी राजा जनक की पत्नी सुनैना के रूप में तथा तीसरी राधा की माता कीर्ति के रूप में अवतरित हुईं। आदिशक्ति ने इन्हीं के यहां जन्म लेकर धर्म और शक्ति की स्थापना की। कथा में माता पार्वती की कठोर तपस्या का प्रसंग विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने हेतु उनके अटूट संकल्प और भक्ति का वर्णन सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।

इस दौरान पूरा पंडाल “हर-हर महादेव” के जयघोष से गूंज उठा। इस अवसर पर पूरा पंडाल भक्ति संगीत, मंत्रोच्चार और पुष्प वर्षा से गूंज उठा। भक्तों ने भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह का सजीव दृश्य देखकर भावविभोर होकर उत्सव में भाग लिया। कथा के उपरांत शिव विवाह की भव्य झांकी प्रस्तुत की गई। भजनों की मधुर धुन पर निकली भोले बाबा की बारात ने वातावरण को पूर्णतः शिवमय बना दिया। श्रद्धालु झूमते-गाते हुए बारात का स्वागत करते नजर आए।

एमएम कथा के आयोजक शकुंतला ओमप्रकाश शर्मा पवन शर्मा जिला पंचायत उपाध्यक्ष एवं शर्मा पटाक परिवार है, जिनके द्वारा भगवान शिव जी के आशीर्वाद से ग्राम लिटिया सेमरिया के में सैकड़ों ग्राम वासियों की उपस्थिति यह कथा आयोजित की जा रही है.. आचार्य विक्रांत दुबे ने शिव महापुराण की दिव्य महिमा का विस्तार से वर्णन करते हुए कहा कि भगवान शंकर का जीवन चरित्र मानव को ज्ञान, विवेक, सहनशीलता, प्रेम, त्याग, संतोष और संस्कारों की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि शिव केवल देव नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक श्रेष्ठ पद्धति हैं।माता पार्वती के जीवन चरित्र पर प्रकाश डालते हुए आचार्य नौटियाल ने समाज को गहरा संदेश दिया।

उन्होंने कहा कि बेटी घर से कुछ लेने नहीं, बल्कि देने आती है। यदि माता-पिता बेटी को अच्छे संस्कार देते हैं तो वह विवाह के बाद अपने ससुराल में माता-पिता का यश बढ़ाती है। यह यश ऐसा धन है, जिसे करोड़ों रुपए देकर भी नहीं खरीदा जा सकता।” उन्होंने तुलसीदास की चौपाई का उल्लेख करते हुए कहा कि जब बेटी सुचारू रूप से परिवार की जिम्मेदारी निभाती है, सेवा और प्रेम से घर को संवारती है, तब माता-पिता का नाम समाज में उजागर होता है।

आचार्य नौटियाल ने समाज में प्रचलित उस सोच पर भी सवाल उठाया, जिसमें बेटे को धन लाने वाला और बेटी को दहेज देने वाली माना जाता है। उन्होंने कहा कि यह धारणा पूरी तरह गलत है, क्योंकि बेटी जन्म से ही यश, सम्मान और संस्कार लेकर आती है।

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